चतरा, फरवरी 23 -- इटखोरी, प्रतिनिधि। तीन दिवसीय इटखोरी राजकीय महोत्सव की अंतिम शाम पूरी तरह भोजपुरी संगीत के रंग में रंगी रही। प्रसिद्ध लोकगायिका कल्पना पटवारी मंच पर जैसे ही पहुंचीं, वैसे ही दर्शकों की तालियों से गूंज उठा। अपने सधे हुए सुरों और पारंपरिक लोक शैली पूर्वी की मधुर प्रस्तुति से कल्पना ने ऐसा जादू बिखेरा कि देर रात तक श्रोताओं के कदम थिरकते रहे। उन्होंने अपने लोकप्रिय ओम जयंती मंगला काली भद्रकाली कापालिनी , मारबो रे सुगवा धनुख से सुगा गिरे मुरझाय , उगी हे दीनानाथ , गीत बाबा दीहले टीकवा, सेहूर हम तेजब, सेहूर हम तेजब, बालमुवा कैसे तेजब हो छोटी ननदी...से माहौल को नए रंग में रंग दिया इसके बाद घरे छुट्टी लेके कुछ दिन रही ऐ बलम जी सिया निकले अवधवा की ओर की होलिया खेले रामलला देख तनी मुस्कि तू मारा तरा जन मारे जान तोहर मैरून कलर साड़ि...
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