नई दिल्ली, दिसम्बर 9 -- माजा दारूवाला,चीफ एडिटर, इंडिया जस्टिस रिपोर्ट देश के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) पद की शपथ लेने से कुछ ही दिनों पहले न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने सभी उच्च न्यायालयों से कहा था कि वे सुरक्षित फैसलों को सुनाने में लगने वाले समय और दूसरी जानकारियां सार्वजनिक करें। उनके इस निर्देश के पीछे दरअसल झारखंड का एक मामला था, जिसमें आजीवन कारावास की सजा पाए चार कैदियों को अपनी आपराधिक अपील पर सुनवाई पूरी होने के बाद लगभग तीन साल से इंतजार करना पड़ रहा था और अंतिम फैसला अधर में लटका था। यह कोई पहली घटना नहीं है, जब शीर्ष अदालत को सुरक्षित फैसलों को लेकर चिंता जतानी पड़ी है। बड़ी संख्या में फैसलों को सुरक्षित रखे जाने की प्रवृत्ति पर हैरानी जताते हुए शीर्ष न्यायालय ने न्यायाधीशों से आपराधिक व सिविल मामलों की अपील को निपटाने के लिए छुट...
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