सहारनपुर, फरवरी 22 -- देवबंद। माह-ए-रमजान भूख और प्यास की शिद्दत बर्दाश्त करने की सीख देते हुए इंसानियत का पैगाम देता है। यानी रमजान का महिना अल्लाह की रजा से गुजारने और सीखकर अगले11 माह की जिंदगी गुजारने की तालीम (शिक्षा) देता है। अदब की महफिलों में ही नहीं बल्कि बेटियों की तालीम के क्षेत्र में भी समाज की खिदमत में पेश-पेश विख्यात शायर डा. नवाज देवबंदी ने कहा कि रोजा एक इबादत है। जिसमे अल्लाह रब्बुल इज्जत ने अपने बंदो से इस मुबारक महिने में गरीबों, जरुरतमंदो, यतिमों और असहायों का ख्याल रखने की हिदायत करता है। उन्होंने बताया कि रोजा हमे रुहानी ही नहीं जिस्मानी एतबार से भी मजबूत बनाता है। डा. नवाज ने बताया कि रोजे में इंसान जब भूख और प्यास की दुश्वारियां बर्दाश्त करता है तब उसके दिल में गरीब असहायों के प्रति हमदर्दी का जस्बा पैदा होता है। ...
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