कानपुर, जनवरी 31 -- कानपुर। राष्ट्रीय शर्करा संस्थान के पूर्व निदेशक और भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा संघ के सलाहकार प्रोफेसर नरेंद्र मोहन ने डालमिया भारत शुगर एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड के आयोजन में भारतीय और इंडोनेशियाई चीनी उद्योग के कर्मियों से चीनी उद्योग में छिपी हरित ऊर्जा क्षमता का दोहन करने की योजना बनाने को कहा। अतिरिक्त इथेनॉल को सतत विमानन ईंधन में परिवर्तित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि चीनी उद्योग फिल्टर केक से उत्पादित जैव-मीथेन का उपयोग करके ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का केंद्र बन सकता है। इस अवसर पर इंडोनेशियाई प्रतिनिधियों को प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए।
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