औरंगाबाद, जुलाई 19 -- औरंगाबाद, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। आपराधिक हमले में प्राथमिकी दर्ज होने के 24 घंटे के अंदर इंज्यूरी रिपोर्ट में जख्म की रंगीन तस्वीर का संलग्न होना आवश्यक है। औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय के प्रभारी जिला जज प्रथम ने जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए उक्त बातें कही। अधिवक्ता सतीश कुमार स्नेही ने बताया कि इससे चोट की प्राकृति और गंभीरता का दस्तावेजीकरण होगा। चोट के कारण निर्धारण और भविष्य में कानूनी कार्रवाई में मदद मिलेगी। यह कोर्ट में सबूत के रूप में पेश होगा। न्यायाधीश ने एक जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि अब झूठी प्राथमिकी दर्ज करवाने पर सात साल से अधिक की सजा हो सकती है। अभियुक्त को अपने उपर हुई प्राथमिकी से बचने के लिए झूठी प्राथमिकी का सहारा लेना खतरनाक हो सकता है। एक अन्य जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा क...
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