जमशेदपुर, दिसम्बर 7 -- झारखंड राज्य विश्वविद्यालय संविदा शिक्षक संघ ने आवश्यकता आधारित शिक्षकों को समायोजित करने के बजाय केवल वरीयता अंक देने के सरकारी निर्णय पर असंतोष जताया है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राकेश पाण्डेय ने कहा कि राज्य सरकार का यह निर्णय उचित नहीं है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन शिक्षकों को समायोजन नहीं मिलेगा, बल्कि प्रतिवर्ष एक और अधिकतम पांच वरीयता अंक दिए जाएंगे। देश के कई राज्यों में ऐसे शिक्षकों को नियमित किया जा चुका है। बिहार में प्रति वर्ष पांच और अधिकतम 25 वरीयता अंक दिए जा रहे हैं, जबकि झारखंड सरकार मात्र अधिकतम पांच अंक देकर औपचारिकता निभाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को शिक्षा और उसकी गुणवत्ता से अब कोई सरोकार नहीं रह गया है। लगभग आठ वर्षों से पढ़ा रहे ये सभी शिक्षक यूजीसी मानकों को पूर...
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