भभुआ, फरवरी 4 -- मौसमी रोजगार, बढ़ती लागत और असंगठित ढांचे ने कारीगरों की बढ़ाई चिंता सामाजिक सुरक्षा, ऋण और सरकारी संरक्षण की मांग कर रहा हलवाई समाज (बोले भभुआ) भभुआ, नगर संवाददाता। शादी-विवाह, तिलक, त्योहार और अन्य मांगलिक कार्यक्रमों को संपन्न कराने में हलवाई समाज की बड़ी भूमिका होती है। स्वादिष्ट पकवान और मिठाइयों के स्वाद समारोह में मिठास घोलते हैं। लेकिन, दूसरों के आंगन में आए लोगों के बीच खुशियों का मिठास घोलने वाले यह कारीगर खुद आर्थिक असुरक्षा और अनिश्चित भविष्य की चिंता से जूझ रहे हैं। साल भर कड़ी मेहनत करने के बावजूद उनकी आमदनी स्थिर नहीं रह पाती। कारीगरों का कहना है कि वह उनका रोजगार पूरी तरह सीजन पर निर्भर करता है। विवाह के महीनों में लगातार काम मिलता है, लेकिन ऑफ सीजन में काम लगभग बंद हो जाता है। ऐसे समय में परिवार का भरण-पोषण क...