नई दिल्ली, दिसम्बर 8 -- सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत कथित अपराध के लिए कुछ आरोपियों के खिलाफ शुरू की गई कार्यवाही रद्द कर दी। यह कहते हुए कि शिकायतकर्ता के घर को 'सार्वजनिक स्थान' के दायरे में नहीं माना जा सकता। हालांकि, जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने यह साफ कर दिया कि पूर्व भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत कथित अपराधों के लिए उनके खिलाफ कार्यवाही कानून के अनुसार जारी रहेगी। पीठ ने आरोपियों द्वारा दायर एक अपील पर अपना फैसला सुनाया। अपील में इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस साल जुलाई के एक आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसने ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा था। ट्रायल कोर्ट ने आरोपियों को आईपीसी और एससी और एसटी अधिनियम के तहत कथित अपराधों के लिए ट्रायल का सामना करने के...