देहरादून, फरवरी 21 -- नकली और मिलावटी दवाओं का फर्जीवाड़ा देहरादून में अफसरों की नाक के नीचे चल रहा था। जिस सहस्त्रधारा रोड पर नकली दवाओं का ये खेल चल रहा था, उसी सड़क पर आयुष निदेशालय है। इसके बाद भी इस फर्जीवाड़े की पांच साल से भी ज्यादा समय से किसी को खबर नहीं हुई। राज्य के प्रशासनिक अमला तब जागा जब केंद्रीय आयुष मंत्रालय हरकत में आया। इसके बाद नकली दवाओं की फैक्ट्री और क्लीनिक पर दबिश दी गई। दबिश में जांच टीम को नकली दवाओं के साथ केंद्र के पंजीकरण का कागज नहीं मिला। जिस त्रिफला हर्बल सेंटर के नाम पर संचालन हो रहा था, उसका पंजीकरण नहीं मिला। त्रिफला ब्रांड भी फर्जी मिला। नकली दवाओं के इस धंधे की पकड़ पूरे देश भर में मजबूत होने के बावजूद देहरादून से लेकर दिल्ली तक अफसरों को कानों कान इसकी खबर नहीं हुई। नकली दवाओं के इस फर्जीवाड़े ने पूर...
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