सीवान, दिसम्बर 15 -- बड़हरिया। भले ही हम आज टेक्निकल युग में जी रहे हैं। कृषि के नए नए औजार से खेती की जारही है। भले ही हल बैल खोजने पर भी नहीं मिलते हों। लेकिन एक दौर ऐसा भी था कि बिना हल-बैल खेती-गृहस्थी का काम असंभव था। हालांकि नयी पीढ़ी ने खेतों में हल चलते नहीं देखा है। आज भी बुजुर्ग लोगों के मन मस्तिष्क में खेत में हल व बैलों के साथ काम करते हुए किसान की छवि ताजा है। दौर बदला है। टेक्नोलाजी ने खेती किसानी के तौर तरीकों को काफी हद तक बदल दिया है। ट्रैक्टर से अब चंद घंटे में कई एकड़ जमीन की जुताई करना हो या मशीनों के माध्यम से कटाई मड़ाई आदि की प्रक्रिया पूरी करनी हो यह सब कुछ बहुत तेजी के साथ हो जाता है। मशीनों के आने के किसान एडवांस बन चुके हैं । वह खेती में टेक्नोलॉजी का प्रयोग कर समय बचाते हैं। लेकिन एक जमाना ऐसा भी था, जब बिना बैल ...