अमरोहा, नवम्बर 2 -- महाभारत काल से लगने वाले तिगरी गंगा मेले का स्वरूप आधुनिक युग में बदल गया है। बीते तीन दशक में ज्यादा बदलाव हुआ है। पहले ज्यादातर श्रद्धालु बैलगाड़ियों से मेले में आते थे लेकिन अब ट्रैक्टर व कारों से ज्यादा श्रद्धालु मेले आते हैं। बैलगाड़ी का प्रचलन काफी कम हो गया है। कई दिन पहले से श्रद्धालुओं को गंगा मेले की तैयारियां करनी पड़ती थी लेकिन अब जरूरत का सभी सामान मेले में ही मिल जाता है। गंगास्नान का मेला श्रद्धालुओं के लिए सरल होता जा रहा है। श्रद्धा और आस्था का प्रतीक तिगरी गंगा मेला अब आधुनिक तकनीक के रंग में रंग गया है। हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाला यह ऐतिहासिक मेला इस बार नए रूप में दिखाई दे रहा है। जहां पहले मिट्टी के रास्ते और सीमित सुविधाएं हुआ करती थीं, वहीं अब डिजिटल युग की झलक हर कोने में देखने को मिल ...
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