अमरोहा, मार्च 6 -- मंडी धनौरा। आधुनिकता की चकाचौंध के बीच बम बजाने की परंपरा गुम नजर आ रही है। डीजे का कानफोड़ू शोर और ढोल की थाप ने बम की गूंज को शांत कर दिया है। इसके पहले शोक उठाने के लिए एकादशी के दिन घरों पर बम बजाने के साथ ही होली भी गाए जाते थे। शहर में अमरोहा रोड पर मोहल्ला गांधी नगर में रामचरन सैनी पुत्र नत्थू सिंह सैनी का परिवार रहता है। इन्ही के परिवार के लोग लंबे समय से होली की बम बजाते चले आ रहे हैं। पहले होली की बम रंग एकादशी से शुरू होकर दुल्हेंडी तक बजाई जाती थी लेकिन अब जिन लोगों के घर मौत हो जाती है वहीं शोक उठाने के लिए बम बजाने वालों को बुलाया जाता है। बम बजाने वाले बुलावे पर ही बम बजाने जाते हैं। रामचरन सैनी बताते हैं कि पहले दुल्हेंडी के दिन रंग खेलते हुए बम बजाई व होली गाई जाती थी। व्यथित मन से कहा कि कुछ लोगों ने त...
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