नई दिल्ली, नवम्बर 27 -- शशांक रंजन, पूर्व कर्नल व आंतरिक सुरक्षा विशेषज्ञ माओवादी विद्रोह अपने आखिरी गढ़ दंडकारण्य के आदिवासी इलाकों में भी खत्म हो रहा है। माओवादी नेतृत्व के एक बड़े हिस्से ने हाल ही में मीडिया में बयान जारी करके लोगों से माफी मांगी है और कहा है कि क्रांति की प्रक्रिया में माओवादी नेतृत्व ने कई रणनीतिक गलतियां कीं। निस्संदेह, दंडकारण्य में करीब आधी सदी से चल रही माओवादी कार्रवाई और आदिवासियों की 'भलाई' के कामों का रिपोर्ट कार्ड काफी खराब है। यह माओवादियों द्वारा अपनी कुत्सित मंशा के लिए आदिवासियों की उम्मीदों से फायदा उठाने जैसा रहा। दरअसल, आंध्र प्रदेश में सफलता न मिल पाने के बाद, माओवादी काडर 1980 के दशक की शुरुआत में दंडकारण्य में घुसे थे। उनका मकसद एक सुरक्षित ठिकाना हासिल करना था, न कि अपने राजनीतिक संघर्ष में स्थानी...
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