वाराणसी, नवम्बर 25 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता।आदिवासी, भगवान श्रीराम को ही आदि मानकर उनका पूजन-अर्चन करते थे। आदिवासियों का श्रीराम से जुड़ाव उनके काल से अनवरत बना हुआ है। श्रीराम और आदिवासियों के जुड़ाव का आधार आदिवासियों के प्रचलित पारंपरिक गीत बने हैं। इस रहस्य का खुलासा अयोध्या में 25 नवंबर को होगा। इन गीतों को आधार बना कर काशी के साहित्यकार डॉ. जयप्रकाश मिश्र ने प्रमाणित किया है कि आदि के रूप में आदिवासियों द्वारा भगवान श्रीराम की पूजा ही की जाती थी। राज्य हिंदी संस्थान द्वारा लोक भूषण सम्मान से अलंकृत डॉ. जयप्रकाश मिश्र ने इस विषय को अपनी नवीन कृति 'आदिवासियों के गीत-मानस के प्रसंग' में संग्रहित किया है। इस पुस्तक का विमोचन 25 नवंबर को अयोध्या में होने वाले ध्वजारोहण समारोह के दौरान किया जाएगा। इस कृति में उन्होंने आदिवासियों के सौ...