गिरडीह, फरवरी 19 -- पीरटांड़, प्रतिनिधि। बसंत ऋतु के मौके पर नई नई फूल पत्तियों का लदा मरांग बुरु पारसनाथ का प्राकृतिक सौंदर्य के बीच संथाल आदिवासियों का बाहा पर्व पर 18 फरवरी से ही धार्मिक विधियां शुरू हो गई है। यह पर्व पर्यावरण के प्रति आभार व्यक्त कर रहा है। बाहा पर्व आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्रकृति प्रेम का अद्भुत उदाहरण है। बाहा पर्व आदिवासी परंपरा को मजबूत करते हुए पर्यावरण संतुलन का संदेश देता है। उल्लेखनीय है कि आदिवासी परंपरा अनुसार बाहा पर्व प्रकृति प्रेम सामूहिक समरसता का जीवंत उदाहरण है। बाहा शब्द का अर्थ फूल होता है। बसन्त ऋतु के मौके पर नई नई फूल पत्तियों से बाहा पर्व सीधा संबंध है। बाहा पर्व न केवल धार्मिक अनुष्ठान बल्कि सामाजिक एकता और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक माना जाता है। मरांग बुरु पारसनाथ में बुधवा...