ललितपुर, जनवरी 15 -- बुन्देलखण्ड के प्रसिद्ध दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र पावागिरि में आयोजित श्रीमज्जिजिनेन्द्र जिनबिम्ब पंचकल्याणक महामहोत्सव के चौथे दिन आस्था और वैराग्य का भावपूर्ण दृश्य देखने को मिला। वात्सल्य मूर्ति मुनि सुब्रतसागर महाराज के सानिध्य में आदिकुमार के राज्याभिषेक, राजतिलक, दीक्षा कल्याणक के संस्कार हुए। कार्यक्रम के दौरान धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि सुब्रतसागर महाराज ने कहा कि पाप केवल कर्मों से ही नहीं, बल्कि अनुचित क्रियाओं से भी पाप का आश्रव होता है। उन्होंने माता-पिता की सेवा, संयमित जीवन और सदाचार का संदेश दिया। कार्यक्रम में असि मसि कृषि सहित षटकर्म का उपदेश, नीलांजना नृत्य से वैराग्य उत्पत्ति तथा 400 तीर्थंकर भगवंतों के वैराग्य व दीक्षा संस्कार विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। आयोजन समिति के अनुसार 16 जनवरी को ज्ञान...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.