नई दिल्ली, जनवरी 27 -- क्या यह छानबीन करना महत्वपूर्ण नहीं है कि आप और मैं एक ऐसी दुनिया में, जहां मैं और आप कुछ भी नहीं हैं, सहयोग कर सकते हैं, संवाद में हो सकते हैं, एक साथ रह सकते हैं? क्या हम औपचारिक रूप से नहीं, बल्कि सही मायने में वास्तविक सहयोग कर सकते हैं? यह हमारी जटिलतम समस्याओं में से एक है, संभवतः सर्वाधिक जटिल। मैं किसी लक्ष्य के साथ अपना तादात्म्य कर लेता हूं और आप भी उसी लक्ष्य के साथ अपना तादात्म्य कर लेते हैं, हम दोनों उसमें दिलचस्पी लेने लगते हैं, हम दोनों उसे पा लेना चाहते हैं। सोचने की यह प्रक्रिया अत्यंत सतही हैं, क्योंकि तादात्म्य द्वारा, जुड़ाव द्वारा हम अलगाव ही लाते हैं और हमारे जीवन में यह कितना साफ दिखाई देता है। आप हिंदू हैं, मैं कैथोलिक। हम दोनों भाईचारे का उपदेश देते हैं और एक-दूसरे की गर्दन पर सवार रहते हैं।...