गौरीगंज, फरवरी 14 -- गौरीगंज। रंजीतपुर में चल रही भागवत कथा में कथा व्यास राधेश्याम शास्त्री ने बताया कि राग और द्वेष दोनों ही मनुष्य के लिए बंधन हैं। जब व्यक्ति किसी से द्वेष करता है तो उसके सभी गुण भी अवगुण प्रतीत होने लगते हैं। जबकि प्रेम करने पर उसके अवगुण भी गुण जैसे लगने लगते हैं। उन्होंने समझाया कि मनुष्य जैसा चिंतन करता है, धीरे-धीरे वैसा ही उसका स्वभाव और व्यक्तित्व बन जाता है। दोषों का चिंतन मन को अशुद्ध, अशांत और दुखी बनाता है, जबकि गुणों का चिंतन हृदय को शुद्ध, शांत और आनंदमय बनाता है। उन्होंने कहा कि जीवन की सफलता और आत्मिक उन्नति की कुंजी केवल प्रेम है।

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