हापुड़, फरवरी 7 -- श्रीमद्भागवत कथा में कथावाचिक आरती वाजपेई ने श्री कृष्ण द्वारा अर्जुन के मोह और शोक को दूर करते हुए आत्मा के अमरत्व का ज्ञान दिया। उन्होंने कहा कि इसी तरह हर इंसान को कृष्ण द्वारा दिए गए उपदेशों को अपने जीवन में उतारना चाहिए। वह शनिवार को गोल मार्केट स्थित छज्जूमल की धर्मशाला में श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन बोल रही थी। कथा वाचिका ने बताया कि आत्मा न जन्म लेती है और न ही मरती है, यह शरीर तो केवल एक वस्त्र की तरह है जिसे आत्मा बदलती है। कर्म-फल के आसक्ति से रहित होकर, समत्व बुद्धि (समान अवस्था) से कर्तव्य (युद्ध) करने का उपदेश दिया। इस दौरान राधा-कृष्ण के भजनों पर भक्तों ने भाव विभोर होकर नृत्य किया। जिसमें मुख्य रूप से यजमान पंडित अरविंद शर्मा सर्राफ, वरिष्ठता अधिवक्ता कृष्णकांत गुप्ता, अंकुश ट्विंकल सर्राफ, वैभव गुप्...