नई दिल्ली, नवम्बर 19 -- मजहब का गलत इस्तेमाल शर्मनाक ही नहीं, भयंकर अपराध भी है। इसी दिशा में, लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी के इस बयान का इस्तकबाल होना चाहिए कि आत्मघाती विस्फोट कतई शहादत नहीं है। गौरतलब है कि दिल्ली विस्फोट के एक आरोपी डॉक्टर उमर उन नबी ने अपने एक वीडियो में आत्मघाती विस्फोट को शहादत बताया है। यह भूल या भ्रांति अक्सर मजहब के नाम पर फैलाई जाती है कि मजहब की राह में फिदायीन हमले जायज हैं। इस भ्रांति को दूर करते हुए ओवैसी ने ऐसी घटना को साफ तौर पर आतंकवाद बताते हुए कहा है कि इस्लाम में आत्महत्या हराम है और मासूमों की हत्या घोर पाप। यह देश के कानून के भी खिलाफ हैं। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख ओवैसी का यह बयान हर आदमी तक पहुंचना चाहिए। वाकई, दुनिया में कोई ऐसा मजहब नहीं है, जो आत्महत्या को सही...
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