गया, फरवरी 15 -- मगध विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा अतिथि भवन में प्रख्यात कवि और आलोचक सदानंद शाही के नवीन काव्य-संग्रह 'संगतराश' का लोकार्पण, परिचर्चा और काव्यपाठ आयोजन किया गया। संग्रह का प्रकाशन वाणी प्रकाशन समूह द्वारा किया गया है। प्रख्यात कवि व आलोचक सदानंद शाही ने संग्रह की रचना-प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए समकालीन उपभोक्तावादी संस्कृति पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आज प्रेम भी बाजारवाद की चकाचौंध में प्रदर्शन की वस्तु बनता जा रहा है। संगतराश कविता के माध्यम से उन्होंने बताया कि सच्चाई और सुंदरता की खोज में लगे लोग अक्सर अल्पमत में होते हैं। लेकिन, इतिहास अंततः उनके पक्ष में खड़ा होता है। उन्होंने गांधी, ईसामसीह और अन्य विचारकों के उदाहरण देकर विचार-दमन की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त की। वक्ताओं ने कहा कि 'संगतराश' संवेद...