नई दिल्ली, अगस्त 8 -- सावन के शुक्ल पक्ष में पूर्णिमा के दिन वरलक्ष्मी व्रत रखा जाता है। इस दिन महालक्ष्मी की दिवाली की तरह पूजा होती है। मान्यता है कि इस दिन वरलक्ष्मी की पूजा से धन समृद्धि और सुख मिलता है। इसमें स्थिर लग्न और प्रदोष काल में वरलक्ष्मी की पूजा फलदायी मानी गई है। वरलक्ष्मी देवी लक्ष्मी का ही स्वरुप हैं। देवी वरलक्ष्मी की पूजा लक्ष्मी के सभी आठ रूपों का सम्मान करने के समान मानी जाती है। वरलक्ष्मी का अर्थ है, महालक्ष्मी जो वरदान दे। यह व्रत खास तौर पर दक्षिणी भारत आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में रखा जाता है। इसमें सुबह से व्रत रखकर शाम के समय वरलक्ष्मी की पूजा करते हैं। इस बार सिंह लग्न पूजा मुहूर्त- सुबह 06:29 से सुबह 08:46 तक है। विवाहित महिलाएं खास तौर परअपने परिवार के कल्याण के लिए यह व्रत रखत...
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