बेगुसराय, मार्च 24 -- खोदावंदपुर, निज प्रतिनिधि। रमज़ानुलमुबारक का पाक महीना अब हमसे विदाई की ओर है। इस माह-ए-मुबारक का आखिरी अशरा चल रहा है। इस अशरे में विशेष इबादत कर गुनाहों से माफी व जहन्नुम की आग से पनाह के लिए खुदा की बारगाह में तौबा करें। यह बात नुरूल्लाहपुर जामा मस्जिद के इमाम मौलाना मोहम्मद मोइनुद्दीन साहब ने 23वें रमज़ानुलमुबारक के मौके पर सोमवार को कही। उन्होंने बताया कि यों तो इस माह का हर पल बड़ा ही नूरानी और काफी कद्र व अहमियत वाला है, पर अंतिम अशरा अपने अंदर बहुत ही ज्यादा खासियत रखता है। इसलिए यह अंतिम दस रोज़ा हमें एतिकाफ़ में बिताने चाहिए। एतिकाफ़ के लफ्ज़ी माने हैं किसी एकांत में ठहर जाना और खुदा की इबादत में दुनियां के तमाम जंजाल व फितना से अपने को अलग करके अपने खालिक से इस तरह रिश्ता जोड़ना की इन दोनों के दरम्यान कोई नहीं ...
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