सोनभद्र, दिसम्बर 9 -- घोरावल, हिंदुस्तान संवाद। अहंकार जीव का सबसे बड़ा शत्रु है। अहंकार के कारण बड़ा से बड़ा व्यक्ति अपना नाश कर लेता है। किसी व्यक्ति में कितनी भी बड़ी योग्यता हो लेकिन अहंकार आने पर उसका सर्वनाश निश्चित है। यह बातें घोरावल नगर स्थित धर्मशाला परिसर में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा में आठवें दिन की कथा में व्यास पीठ से प्रवचन करते हुए वृंदावन के ब्रजरज दास ने कही। उन्होंने कहा कि मानव जीवन के लिए सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है तथा अहंकार सबसे बड़ा शत्रु है। इसके पश्चात गोवर्धन पूजा की झांकी का बहुत ही सजीव चित्रण प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर भगवान ने गोवर्धन पूजा के माध्यम से इंद्र के अहंकार का भी दमन किया। अष्टम दिवस की कथा में भगवान के गोवर्धन स्वरुप का वर्णन किया गया। साथ ही गोवर्धन पूजा व 56 भोग लगाकर भगवान की पूजा की गई। ...