वाराणसी, फरवरी 25 -- वाराणसी, वरिष्ठ संवाददाता। आईआईटी बीएचयू के खनन अभियांत्रिकी विभाग के एक अध्ययन में मस्कुलोस्केलेटल डिसऑर्डर्स को कम करने के लिए प्रभावी एर्गोनोमिक उपायों की पहचान की गई है। यह विकार लंबे समय तक असहज मुद्रा में कार्य करने वाले कर्मचारियों, जैसे डम्पर ऑपरेटर, मशीन ऑपरेटर और कंप्यूटर पेशेवरों में अधिक पाए जाते हैं। अध्ययन के संबंध में विभाग के डॉ. संजय कुमार पालेई ने बताया कि सही 'वर्क पॉस्चर' रीढ़ को संतुलित रखता है और मांसपेशियों पर भार समान रूप से वितरित करता है। जबकि झुककर बैठना या गर्दन आगे मोड़ना पीठ, गर्दन और कंधों में दर्द का कारण बनता है। यह शोध विभाग के पीएचडी शोधार्थी जितेन्दर सिंह ने ओपनकास्ट खनन क्षेत्रों में कार्यरत 36 डम्पर ऑपरेटरों पर किया। उन्नत डिजिटल ह्यूमन मॉडलिंग तकनीक और अंतरराष्ट्रीय एर्गोनोमिक मू...