मेरठ, दिसम्बर 7 -- जागृति विहार स्थित वेदांत आश्रम में हो रहे गीता ज्ञान यज्ञ में रविवार को कथावाचक ने गीता के छठे अध्याय आत्मसंयम योग का वर्णन किया। विधि विधान से व्यास पूजन और दीप प्रज्ज्वलित किया गया। कथावाचक स्वामी अभयानंद सरस्वती महाराज ने गीता ज्ञान यज्ञ में प्रवचन करते हुए कहा कि शुद्ध अंत करण के द्वारा ही उस परम शुद्ध परमात्मा का पूजन हो सकता है। संग्रह और परिग्रह की वृत्ति हमें बहिर्मुखी बनाती है। सत्य बोलकर मन शांत और असत्य बोलकर मन में अशांति रहती है। मनुष्य की सामान्य आवश्यकताएं कम हैं, लेकिन परिग्रह की वृत्ति बढ़ गई है। जिस प्रकार रोग होने पर परहेज और पथ्य का पालन करना होता है, उसी प्रकार योग में स्थित होने के लिए आसन, आहार, विहार आदि नियमों का पालन करना होता है। हितेश त्यागी, प्रियांक सिंघल, बी.डी. पांडे, वीना, माधुरी, शौर्य...
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