गंगापार, जनवरी 3 -- माघ मेला 2026 का शुभारंभ हो चुका है, लेकिन शुरुआत के साथ ही मेला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। श्रद्धा, तप और आस्था के इस महापर्व में साधु-संतों, कल्पवासियों और सांस्कृतिक संस्थाओं को भूमि आवंटन व बुनियादी सुविधाओं के अभाव में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। संत समाज का आरोप है कि वे बीते एक महीने से दिन-रात मेला प्रशासन के कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं की कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही। आरोप है कि 16-16 घंटे तक भटकने के बाद भी समाधान न मिलने से क्षुब्ध संतों को न्याय की गुहार लगाने के लिए मेलाधिकारी कार्यालय के इर्द-गिर्द भटकना पड़ रहा है, जो प्रशासनिक संवेदनहीनता को उजागर करता है। कृषक उत्थान सेवा समिति कौंधियारा-करछना के सचिव अरुण त्रिपाठी ने बताया कि उनकी संस्था...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.