खगडि़या, जनवरी 13 -- अलौली। एक प्रतिनिधि समय के साथ पशुपालन की सोच में भी बदलाव देखा जा रहा है। जिस कारण क्षेत्र में बदहाल जीवन जी रहे पशुपालकों के समक्ष पशु के लिए कोई ठोस कोई योजना देखने को नहंी मिल रही है। पशुओं का रख रखाव भी काफी कठिनाई हो रही है। बाढ़ व बारिश के दौरान जानवर को तीन चार माह पलायन करना पड़ता है। ठंड के समय में पशु को सुरक्षित रख पाना सब के वश की बात नहीं होती है। इस मौसम में बड़े जानवर भी देखते ही देखते मर जाते हैं। छोटे पशु जैसे बकरी भी सुरक्षित नहीं रख पाते हैं। गर्मी के मौसम में अधिकांश जानवर पानी की खोज करते रहते हैं। बताया जाता है कि क्षेत्र में नदियों का जल स्तर काफी नीचे जा रहा है। कुछ नदियों तो कछ माह सूख ही जाती है। वहीं पुराने सभी तालाब अब नष्ट हो गए हैं। कुंआ नाम मात्र का ही रहा है। अधिकांश पशु पालक चापानल के भर...