नई दिल्ली, दिसम्बर 22 -- जलवायु परिवर्तन के दौर में प्राकृतिक संसाधनों की चिंता अगर प्राथमिकता होनी चाहिए, तो इस विषय को राजनीति से बचाना भी आज की बड़ी आवश्यकता है। पहाड़ों, जंगलों, नदियों और जल स्रोतों को सुरक्षित रखना हमारा कर्तव्य है। जहां एक ओर, अरावली पर्वत शृंखला को लेकर सीकर से उदयपुर तक प्रदर्शन हुए हैं, तो वहीं दूसरी ओर, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने उन दावों को खारिज किया है कि केंद्र ने अरावली पहाड़ियों के संरक्षण में ढील दे दी है। दरअसल, पिछले पखवाड़े से ही यह चिंता हावी है कि अरावली की सुरक्षा से समझौता किया जा रहा है। अब जब केंद्रीय मंत्री ने गलतफहमियों को दूर करने की कोशिश की है, तो भ्रम के बादल छंटने चाहिए। माना जाता है कि यह अपने देश की सबसे प्राचीन पर्वत शृंखला है और जब टेक्टोनिक प्लेटे...