नई दिल्ली, जनवरी 15 -- भारतीय वायुसेना और नौसेना के लिए लड़ाकू विमानों की खरीद अब केवल 'हथियार खरीदने' तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह भारत की बदलती भू-राजनीति का सबसे बड़ा सबूत है। जब भारत ने फ्रांस से 26 राफेल-मरीन (नौसेना के लिए) और अतिरिक्त राफेल (वायुसेना के लिए) खरीदने का मन बनाया, तो रक्षा गलियारों में एक सवाल गूंजा- जब बाजार में 5वीं पीढ़ी का अमेरिकी F-35 और रूसी Su-57 मौजूद हैं, तो हम 4.5 पीढ़ी के राफेल पर ही क्यों रुके हैं? इसका जवाब तकनीकी कम और रणनीतिक ज्यादा है। भारत का निशाना अब इस्लामाबाद नहीं, बीजिंग है और चीन से निपटने के लिए आपको सिर्फ 'स्टील्थ' नहीं, 'भरोसा' और 'संप्रभुता' चाहिए। आइए, इसे विस्तार से समझते हैं।पाकिस्तान नहीं, चीन है 'सेंटर स्टेज' में दशकों तक भारत की रक्षा खरीद का पैमाना यह होता था कि- क्या यह पाकिस्तान के F...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.