नई दिल्ली, अगस्त 29 -- अज्ञानता में आशीर्वाद भी अभिशाप बन जाते हैं, और समझ में आने पर अभिशाप भी आशीर्वाद बन जाते हैं। असली सवाल अभिशाप या आशीर्वाद का नहीं है। असली सवाल उस कीमिया को जानने का है, जो कांटों को फूलों में बदल देती है। एकनाथ प्रतिदिन भोर में गोदावरी नदी में स्नान करने जाते थे। जैसे ही वह स्नान करके लौटते, एक व्यक्ति उन पर थूक देता। वह हंसते और फिर से स्नान करते। धर्म के स्वयंभू संरक्षकों ने उस व्यक्ति को इस काम पर रखा था, लेकिन शर्त यह थी कि उसे उसका इनाम तभी मिलेगा, जब वह एकनाथ को क्रोधित कर दे। एक दिन, दो दिन, एक सप्ताह, दो सप्ताह बीत गए और उस व्यक्ति के सारे प्रयास व्यर्थ होते गए। फिर उसने एक आखिरी प्रयास किया। एक दिन उसने एकनाथ पर एक सौ सात बार थूका। एकनाथ हर बार हंसते और फिर से गोदावरी में स्नान करने चले जाते। उस व्यक्ति ...
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