नई दिल्ली, दिसम्बर 14 -- अभिनेत्री यौन उत्पीड़न मामले में पीड़िता ने रविवार को कहा कि निचली अदालत का फैसला उनके लिए कोई आश्चर्य की बात नहीं है, क्योंकि इन वर्षों में उन्हें एहसास हुआ कि देश में हर नागरिक के साथ विधि के समक्ष समान व्यवहार नहीं किया जाता। एक सोशल मीडिया पोस्ट में पीड़िता ने आरोप लगाया कि मुकदमे के दौरान उनके मौलिक अधिकारों की रक्षा नहीं की गई। उन्होंने यह भी कहा कि फैसले से यह स्पष्ट होता है कि मानवीय विवेक न्यायिक निर्णयों को कैसे प्रभावित कर सकता है। हालांकि, पीड़िता ने यह स्वीकार किया कि हर अदालत एक ही तरह से काम नहीं करती है। पीड़ित अभिनेत्री ने इंस्टाग्राम पर लिखा कि वर्षों के दर्द, आंसुओं और भावनात्मक संघर्ष के बाद, मुझे एक कड़वी सच्चाई का एहसास हुआ है कि विधि के समक्ष इस देश में हर नागरिक के साथ समान व्यवहार नहीं होत...
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