नई दिल्ली, नवम्बर 20 -- संजीव बजाज, उद्यमी पिछले मंगलवार की सुबह मेरे दोस्त का गुरुग्राम से फोन आया। चिंतित आवाज में उसने कहा, 'बेटी को फिर से अस्पताल ले जा रहा हूं। इस महीने यह तीसरी बार है।' उसकी सात साल की बेटी रात भर खांसती रही। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की जहरीली हवा से सांस के 'इन्फेक्शन' का मामला था। मैंने फौरन अपना फोन चेक किया, तो एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 503 दिखा। एक्यूआई का यह स्तर अब आपात स्थिति के बजाय सालाना 'हेडलाइन' जैसा लगता है। अक्सर जब हम वायु प्रदूषण की बात करते हैं, तो सिर्फ सेहत के पहलू पर ध्यान देते हैं, लेकिन एक और संकट चुपचाप सामने आ रहा है और यह संकट भारतीय घरों की वित्तीय मजबूती में सेंध मार रहा है। गौर कीजिए, अकेले सितंबर महीने में देश के अस्पतालों में भर्ती हाेने वाले मरीजों के बीमा दावों में लगभग नौ प्र...