नई दिल्ली, नवम्बर 11 -- अरुण कुमार,वरिष्ठ अर्थशास्त्री इन दिनों आठवें वेतन आयोग को लेकर देश में हलचल तेज है। इसके 'टर्म ऑफ रेफरेंस', यानी आयोग के कामकाज की शर्तें और सीमाएं बताने वाले दस्तावेज जारी कर दिए गए हैं। मगर, आरोप यह भी लग रहे हैं कि सातवें और आठवें वेतन आयोग की शर्तों में अंतर है, जिसके कारण 69 लाख पेंशनभोगी इस प्रक्रिया से बाहर हो गए हैं। हालांकि, एक बहस आयोग की सिफारिशों का देश के श्रम-बल और यहां की आर्थिकी पर पड़ने वाले असर को लेकर भी चल रही है। यह सच है कि तकरीबन हर दस साल पर वेतन आयोग का गठन किया जाता है, क्योंकि सरकार मानती है कि अगर महंगाई के हिसाब से तनख्वाह में बढ़ोतरी न हो, तो कर्मचारियों के जीवन-स्तर में गिरावट आती है। यह एक अच्छी सोच है। मगर ऐसी सिफारिशें सरकारी खजाने पर बोझ भी बढ़ाती हैं। संभवत: इसीलिए, इस बार आयोग ...
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