रांची, फरवरी 1 -- रांची, संवाददाता। कोल इंडिया के कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) फंड के सहयोग से संचालित आईआईटी बॉम्बे की पायलट परियोजना 'जीवोदया' ने तीन वर्षों के अनुसंधान और विकास के बाद नैतिक रेशम उत्पादन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इस परियोजना के तहत आईआईटी बॉम्बे के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए प्रौद्योगिकी विकल्प केंद्र (सी-तारा) ने रेशम उत्पादन की ऐसी अभिनव तकनीक विकसित की है, जिसमें रेशम के कीड़ों को मारने की आवश्यकता नहीं होती। पारंपरिक विधि से अलग, इस तकनीक में रेशम के कीड़े रेशमी धागा उत्पन्न करने के बाद पतंगे (मॉथ) में परिवर्तित होकर अपना प्राकृतिक जीवन चक्र पूरा कर पाते हैं। मानवीय और नैतिक दृष्टिकोण को दर्शाते हुए इस रेशम को 'जीवोदया सिल्क' नाम दिया गया है। परंपरागत रूप से कैसे अलग परंपरागत रूप से शहतूत की...
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