लखनऊ, सितम्बर 2 -- लखनऊ में गोसाईगंज क्षेत्र के बरुआ गांव में 90 वर्ष की अफसरों से वृद्धा न्याय की गुहार लगाते-लगाते चल बसी। उसे अपने ही घर में जगह नहीं मिली और बरामदे में ही जिंदगी गुजारनी पड़ी। न्याय की आस में वृद्धा ने 19 अगस्त को दम तोड़ दिया। 29 अगस्त को उसकी तेरहवीं भी हो गई लेकिन न्याय नहीं मिला। एक सितंबर को लेखपाल ने शिकायत पर फोन किया। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि शिकायतों का क्या हाल है। तहसील की राजस्व कोर्ट ने वृद्धा को उसके हिस्से में रहने के आदेश दिए। कोर्ट ने आदेश का पालन करने के लिए तहसीलदार व पुलिस को आदेशित किया लेकिन 16 महीने बाद भी सरकारी मशीनरी ने कोई कार्रवाई नहीं की। अंतिम सांसे गिन रही वृद्धा को न्याय की आस थी। 18 अगस्त को तहसील के सम्पूर्ण समाधान दिवस में अपने पोते से शिकायती पत्र भिजवाया। अफसरों को उनके आदेश ...
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