नई दिल्ली, जनवरी 13 -- सुप्रीम कोट ने सरकारी अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार मामलों की जांच शुरू करने से पहले अनुमति लेने से संबंधित, भ्रष्टाचार रोधी कानून की 2018 की धारा की संवैधानिक वैधता पर मंगलवार को खंडित निर्णय सुनाया। इस मुद्दे पर फैसला सुनाने वाली पीठ में शामिल जजों की अलग-अलग राय होने के चलते अब इस मामले को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के समक्ष रखने का निर्देश दिया है ताकि इस मुद्दे पर फैसला करने के लिए बड़ी पीठ गठित की जा सके। केंद्र ने जुलाई 2018 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 में संशोधन करते हुए धारा 17ए का प्रावधान शामिल किया था। इसके अंतर्गत सक्षम प्राधिकारी की पूर्व मंजूरी के बिना आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन में की गई सिफारिशों/आदेशों के लिए किसी भी लोकसेवक के खिलाफ 'जांच या पूछताछ' नहीं की जा सकती है। याचिकाकर्ता संगठन...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.