नई दिल्ली, जनवरी 11 -- स्वामी विवेकानंद की जयंती पर मनाया जाने वाला राष्ट्रीय युवा दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि भारत की चेतना को झकझोरने वाला अवसर है। यह कर्तव्य व राष्ट्र-निर्माण के पथ पर अग्रसर होने के लिए देश के युवाओं का आह्वान करता है। औपनिवेशिक दासता में जकड़े भारत में जब आत्मग्लानि और हीन भावना गहराती जा रही थी, तब विवेकानंद ने नौजवानों से कहा, वे उठें, जागें और अपनी अंतर्निहित शक्ति को पहचानें। यही विचार आज भी प्रासंगिक है। सन् 1985 में राजीव गांधी सरकार द्वारा उनकी जयंती को 'राष्ट्रीय युवा दिवस' घोषित करने का उद्देश्य यही था कि देश का युवा वर्ग केवल नौकरी या व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रहे, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपने उत्तरदायित्व को समझे, स्वामी विवेकानंद का जीवन स्वयं में एक जीवंत प्रयोगशाला था, जिसमें ज्ञान, भक्ति, कर्...