नई दिल्ली, जनवरी 7 -- उपनिषद् में कहा गया है कि वास्तव में समय नहीं बीतता, हम बीत जाते हैं। हम इस नए वर्ष में नए गुण, नई सोच, नई विधा, नया चिंतन और अच्छे कर्म अपने जीवन में ले आएं। किसी नादान की तरह नहीं जिएं। जिएंं तो एक जाग्रत व्यक्ति की तरह जिएं। जब हम जाग्रत होकर जिएंगे, तो बाहर-अंदर सब कुछ नया होगा। आइए हम जाग्रत जीवन जीने का संकल्प लें और अपने जीवन में नयापन लाएं। मैं आपको कुछ संकल्प करने को कहूंगी, तो उसको आप आसानी से तोड़ सकते हो। जब आप खुद संकल्प करोगे कि मैं यह करूंगा, तो आप उसे खुशी से कर लोगे। आपका अहंकार और अपने प्रति प्यार आपको उस संकल्प को पूरा करने के लिए मजबूर करेगा। अपनी आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत का यही सही समय है। शुरुआत इस चिंतन से करें कि अब तक आपने कितनी साधना की है? मन के कितने दोष दूर किए हैं? मन का कितना अज्ञान द...