नई दिल्ली, दिसम्बर 25 -- आज की तेज रफ्तार जिंदगी में तनाव को हम अक्सर सिर्फ मानसिक परेशानी मान लेते हैं, लेकिन सच यह है कि स्ट्रेस सिर्फ दिमाग तक सीमित नहीं रहता, वह शरीर में बस जाता है। न्यूट्रिशनिस्ट श्वेता शाह के अनुसार, जब कोई महिला लंबे समय तक तनाव में रहती है, तो उसका पहला असर गट (पाचन तंत्र) पर और फिर हार्मोनल सिस्टम पर दिखाई देता है। यही वजह है कि ब्लोटिंग, एसिडिटी, गैस, अनियमित पीरियड्स, देर से साइकल आना या ज्यादा दर्द जैसे लक्षण आम हो जाते हैं। तनाव के दौरान शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन बढ़ जाता है। यह हार्मोन शरीर को 'सर्वाइवल मोड' में ले जाता है, जहां पाचन धीमा हो जाता है और प्रजनन से जुड़े हार्मोन बैकसीट पर चले जाते हैं। नतीजा- डाइजेशन बिगड़ता है और पीरियड्स का नेचुरल रिदम टूटने लगता है। आयुर्वेद इसे वात दोष के बढ़ने से भी जोड़...
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