गिरडीह, जनवरी 7 -- झारखंडधाम, प्रतिनिधि। क्षेत्र में नदियों से हो रहे अत्यधिक और अवैध बालू उठाव ने जलस्रोतों के अस्तित्व पर गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। लगातार हो रहे बालू खनन के कारण छोटी-बड़ी नदियां तेजी से सूखने लगी हैं। कई स्थानों पर नदी की धारा सिकुड़ गई है और जल का प्राकृतिक बहाव बाधित हो रहा है। हालात ऐसे हैं कि जिन नदियों में सालभर पानी रहता था, वहां अब घास और झाड़ियां उग आई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बालू की अंधाधुंध निकासी से नदी का तल गहरा और असंतुलित हो गया है। इसका सीधा असर भूजल स्तर पर भी पड़ रहा है। कई गांवों में कुएं और चापानल गर्मियों में सूखने लगते हैं, जिससे उस समय पेयजल संकट गहरा जाता है। चिंता की बात यह भी है कि कुछ लोग सूखी होती नदियों की जमीन पर अवैध रूप से खेत बना रहे हैं, जिससे भविष्य में नदी के पुनर्जीवन की ...