नई दिल्ली, जून 29 -- देवगुरु बृहस्पति को ज्योतिष में विशेष स्थान प्राप्त है। देवगुरु बृहस्पति को गुरु को ज्ञान, शिक्षक, संतान, बड़े भाई, शिक्षा, धार्मिक कार्य, पवित्र स्थल, धन, दान, पुण्य और वृद्धि आदि का कारक ग्रह कहा जाता है। बृहस्पति ग्रह 27 नक्षत्रों में पुनर्वसु, विशाखा, और पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र के स्वामी होते हैं। इस समय गुरु अतिचारी अवस्था में होंगे। ज्योतिषशास्त्र में अतिचारी होने का मतलब है बहुत तेज चलना। आमतौर पर गुरु 12 से 13 महीने में राशि परिवर्तन करते हैं लेकिन अतिचारी होने पर बहुत जल्दी-जल्दी राशि परिवर्तन करते हैं। इस समय गुरु मिथुन राशि में विराजमान हैं। गुरु अब 18 अक्टूबर को कर्क राशि में प्रवेश कर जाएंगे। ज्योतिष गणनाओं के अनुसार अतिचारी गुरु के कर्क राशि में प्रवेश करने से कुछ राशि वालों को जबरदस्त लाभ होगा। आइए जानते...
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