बांका, दिसम्बर 7 -- बांका, नगर प्रतिनिधि -: जिले की जीवनरेखा कही जाने वाली चांदन व ओढ़नी नदी आजकल गंभीर संकट के दौर से गुजर रही हैं। कभी जिन कल-कल बहती धाराओं को शहर की प्यास बुझाने, सिंचाई करने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने का आधार माना जाता था, आज वही नदियां अतिक्रमण का दर्द झेल रही हैं। बीते कुछ वर्षों में नदी के तटों से लेकर नदी के बीच तक लोगों ने खुलेआम कब्जा जमाना शुरू कर दिया है। कहीं नदी के बीच में सब्जियों के साथ साथ अन्य फसलों की खेती लहलहा रही है, तो कहीं मिट्टी डालकर अस्थायी और स्थाई दोनों तरह के पक्के आशियानों की नींव रखी जा रही है। सबसे हैरानी की बात यह है कि यह सब प्रशासन की आंखों के सामने हो रहा है, मगर कार्रवाई तक बात ही नहीं पहुँच पा रही है। नदियां किसी भी जिले की धड़कन होती हैं। लेकिन यदि धड़कन को ही कमजोर कर दिया जाए, तो...