हापुड़, दिसम्बर 25 -- हापुड़। पूर्व प्रधानमंत्री द्वारा खुद अपने कलम से लिखे गए शब्द आज भी हापुड़ की हैंडलूम नगरी पिलखुवा में रखे हुए हैं। 45 साल पहले कागज के पेज में उकेरे गए शब्दों के अर्थ आज भी उस समय की सियासत को बखान कर रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री ने लिखा था कि जब मै पहली बार सांसद बना था तो उस समय संसद में हम केवल चार सांस होते थे। चिट्ठी में लिखा है कि 4 जनवरी को मिले पत्र का जवाब 8 फरवरी को दे रहा हूं, क्योंकि हारे थके सिपाही के घाव सहलाने में वक्त लगता हैं। ये शब्द पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेयी जी के लिखे हुए एक चिट्ठी के माध्यम से पिलखुवा में आए थें। अटल विहारी वाजपेयी की जयंती को भाजपा शताब्दी वर्ष के रुप में मना रही है। पिलखुवा में स्वर्गीय शिवकुमार गोयल जी के घर देश और दुनिया के लोकप्रिय नेता में से एक रहे देश में तीन...
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