नई दिल्ली, दिसम्बर 9 -- दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि अजमेर स्थित ख्वाजा साहब दरगाह परिसर में व उससे जुड़े क्षेत्रों में किसी भी ढांचे को ध्वस्त करने से पहले प्रभावित पक्षों को अनिवार्य रूप से सुना जाए। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना प्रक्रिया का पालन किए सीधे कार्रवाई करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ होगा। न्यायमूर्ति सचिन दत्ता की पीठ ने कहा कि 22 नवंबर को जारी ध्वस्तीकरण के नोटिस के आधार पर कोई भी त्वरित या एकतरफा कदम उठाने से पहले संबंधित प्रत्येक व्यक्ति को अलग-अलग कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए। उन्हें सुनवाई का अवसर प्रदान किया जाए। उसके बाद ही एक स्पष्ट व तर्कसंगत आदेश पारित किया जाए। यह आदेश सैयद मेराज मियां द्वारा दायर याचिका पर पारित किया गया। याचिकाकर्ता ने अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा जारी ...