नई दिल्ली, जून 6 -- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों में आरोपियों को बिना सोच विचार के अग्रिम जमानत नहीं दी जानी चाहिए। शीर्ष अदालत ने हत्या और हत्या प्रयास के मामले में पटना हाईकोर्ट द्वारा चार आरोपियों को दी गई अग्रिम जमानत रद्द करते हुए टिप्पणी की। जस्टिस विक्रम नाथ, संजय करोल और संदीप मेहता की पीठ ने हाल ही में पारित अपने फैसले में कहा कि हाईकोर्ट ने हत्या और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर प्रकृति के अपराधों से जुड़े मामले में आरोपियों को अग्रिम जमानत देने लिए कोई उचित तर्कपूर्ण आधार नहीं बताया। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह समझ से परे है कि हाईकोर्ट ने आरोपियों को अग्रिम जमानत क्यों दी। आदेश में न्यायिक विश्लेषण का पूरी तरह से अभाव दिख रहा है। इसके साथ ही, शीर्ष अदालत ने कहा कि गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों...
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