बिजनौर, जनवरी 3 -- पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों में उड़ान होती है। मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है। जी हां ऐसा ही कर दिखाया नेत्रहीन मुकेश ने। नेत्रहीन पैदा हुए मुकेश ने कभी खुद को असहाय महसूस नहीं किया और हौसलों के दम पर खुद को साबित कर दिया। मुकेश ने बिजनौर जिला मुख्यालय पर 2008- 9 में एक्सीलरेटेड लर्निंग कैंप में ब्रेल लिपि सीखी और ब्रेल लिपि की मदद से बीए तक पढ़ाई की और आज नौकरी कर अपने परिवार को पाल रहे हैं तथा जिले के अन्य दिव्यांगों के लिए मिसाल बने हैं। मुकेश कुमार पिता रामस्वरूप सिंह निवासी ग्राम फतेहपुर धारा अफजलगढ़ नेत्रहीन है। मुकेश नेत्रहीन ही पैदा हुए थे। उन्होंने अंधेरे से हार नहीं मानी और लगातार मंजिल की ओर बढ़ते गए। प्राथमिक शिक्षा गांव से हुई। बिजनौर में चल रहे एक्सीलरेटेड लर्निंग कैंप में उन्होंने ...
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