नई दिल्ली, नवम्बर 6 -- भारत की स्वतंत्रता संग्राम की गूंज में एक ऐसा गीत है जो न केवल राष्ट्रप्रेम की भावना जगाता है, बल्कि मातृभूमि को देवी के रूप में पूजने की परंपरा को जीवंत करता है। 'वंदे मातरम'- ये दो शब्द आज भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में गूंजते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह गीत कैसे और कब रचा गया? कैसे यह बंगाल के एक उपन्यास से निकलकर पूरे देश की आवाज बन गया? और कैसे यह स्वतंत्रता आंदोलन का प्रतीक बना, जिसने ब्रिटिश शासन की नींव हिला दी? आइए, इतिहास की उन पन्नों को पलटें जहां राष्ट्रवाद की लौ पहली बार प्रज्वलित हुई।उत्पत्ति: बंकिम चंद्र की कलम से जन्म वंदे मातरम की जड़ें 19वीं सदी के बंगाल में हैं, जब भारत ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन की जंजीरों में जकड़ा हुआ था। इस गीत के रचयिता थे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय, जिन्हें बंगाली साहित्य...
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