रांची , मार्च 31 -- झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य में 750 करोड़ रुपये से अधिक के कथित शराब घोटाले को लेकर बड़ा मुद्दा उठाया है।

श्री मरांडी ने राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार को पत्र लिखकर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए तत्काल चार्जशीट दाखिल कराने और पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की है।

मरांडी ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि वर्ष 2022 में राज्य की उत्पाद नीति में बदलाव कर एक विशेष सिंडिकेट को लाभ पहुंचाया गया, जिससे राज्य को भारी राजस्व नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि शुरुआत में 38 करोड़ रुपये का अनुमानित यह घोटाला जांच के दौरान बढ़कर 750 करोड़ रुपये से अधिक का हो गया है।

उन्होंने एसीबी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एजेंसी निष्पक्ष जांच के बजाय भ्रष्टाचारियों को बचाने का काम कर रही है। मरांडी के अनुसार, एसीबी ने दिखावे के लिए कई गिरफ्तारियां कीं, लेकिन समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं कर आरोपियों को कानूनी राहत दिलाने का रास्ता खुद ही तैयार कर दिया।

पत्र में उल्लेख किया गया है कि 20 मई 2025 को तत्कालीन उत्पाद सचिव आईएएस विनय कुमार चौबे और संयुक्त उत्पाद आयुक्त गजेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद 21 मई को झारखंड स्टेट बेवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (जेएसबीसीएल) से जुड़े अधिकारियों समेत अन्य आरोपियों को भी हिरासत में लिया गया। वहीं, अक्टूबर 2025 में महाराष्ट्र और गुजरात से सात अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी हुई।

मरांडी ने बताया कि एसीबी द्वारा 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं करने के कारण कई आरोपियों को 'डिफॉल्ट बेल' मिल गई।

मुख्य आरोपी विनय चौबे को 19 अगस्त 2025 को जमानत मिली, जबकि अन्य आरोपियों को भी इसी आधार पर राहत मिलती गई। अब तक गिरफ्तार 17 में से 14 आरोपी जमानत पर बाहर हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जनवरी 2026 में गिरफ्तार छत्तीसगढ़ के कारोबारी नवीन केडिया ट्रांजिट बेल मिलने के बाद फरार हो गया, जिसे पकड़ने में एसीबी विफल रही है।

श्री मरांडी ने राज्यपाल श्री गंगवार से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए इसे सीबीआई को सौंपना आवश्यक है, ताकि दोषियों को सख्त सजा मिल सके और जनता का विश्वास बहाल हो सके।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित