नई दिल्ली , दिसंबर 3 -- वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में कुछ सबसे अधिक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों से उत्सर्जन को रोकने के लिए एक निर्णायक कदम के रूप में 2,254 औद्योगिक इकाइयों को 31 दिसंबर, 2025 तक कैलिब्रेटेड ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (ओसीईएमएस) और वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरण (एपीसीडी) स्थापित करने की अंतिम समय-सीमा दी है।
यह निर्देश वायु प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों की उन 17 चिन्हित श्रेणियों के लिए दिया गया है, जिनमें धातु, वस्त्र, खाद्य और खाद्य प्रसंस्करण, और गंभीर व मध्यम श्रेणी का प्रदूषण फैलाने वाली वे इकाइयां शामिल हैं, जिनकी दिल्ली के पीएम 2.5 श्रेणी के प्रदूषण में बड़ी भूमिका है।
सीएक्यूएम अधिकारियों के अनुसार, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों (एसपीसीबी) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को इन निर्देशों के कार्यान्वयन की निगरानी करने और उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है, यहां तक कि निर्देशों का पालन न करने वाली इकाइयों को बंद करने के आदेश भी जारी किए जा सकते हैं। अधिकारियों ने बताया कि शुरुआत में दोषी उद्योगों को ओसीईएमएस और एपीसीडी की स्वैच्छिक और त्वरित स्थापना के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, लेकिन समय सीमा के बाद निर्देशों को लागू करने की प्रक्रिया को सख्त कर दिया जाएगा।
सीपीसीबी ने बताया कि ओसीईएमएस की स्थापना के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) पहले ही जारी की जा चुकी है और एनसीआर एसपीसीबी को शीघ्र और सत्यापित स्थापना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, निगरानी और प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों की कीमतों पर भी आयोग नज़र रख रहा है ताकि कीमतों में वृद्धि को रोका जा सके, क्योंकि इससे अनुपालन में देरी हो सकती है।
दिल्ली में चल रहे करीब 3,500 उद्योगों में से 2,254 उद्योग प्रदूषणकारी श्रेणी में आते हैं और इस आदेश के दायरे में हैं। अधिकारियों ने बताया कि एक बार स्थापित होने के बाद ओसीइएम नियामकों को वास्तविक समय में उत्सर्जन पर नज़र रखने की सुविधा देगा, और सीमा का उल्लंघन करने वाली किसी भी इकाई पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
बुधवार को पर्यावरण मंत्रालय ने आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, सीएक्यूएम, सीपीसीबी, दिल्ली सरकार, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और अन्य संबंधित एजेंसियों सहित हितधारकों के साथ आयोजित छठी उच्च स्तरीय बैठक के दौरान यह निर्णय लिया गया।
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